पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत के साथ नए व्यापार मार्ग तलाश रहा बेलारूस, जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। बेलारूस के महावाणिज्य दूत अलियाक्सांद्र मात्सुको ने व्यापार में भारत-बेलारूस सहयोग, ब्रिक्स-एससीओ संबंध, फर्टिलाइजर और पेमेंट सिस्टम, जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस सहयोग और मुंबई में रहने के अपने अनुभव को लेकर न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ खास बातचीत की। रविवार को उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग भारत और बेलारूस के बीच सहयोग के सबसे जरूरी स्तंभों में से एक है और हमें इस तरह के क्षेत्र को विकसित करना है।
बेलारूस और भारत के बीच संबंधों को लेकर मुंबई में बेलारूस के महावाणिज्य दूत अलियाक्सांद्र मात्सुको ने आईएएनएस से कहा, "असल में, बेलारूस और भारत फिल्म इंडस्ट्री में काफी गहराई से सहयोग कर रहे हैं। बेलारूस को भारत में होने वाले अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में बुलाया जाता है, जैसे मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, इंडियन फिल्म इंटरनेशनल फेस्टिवल। हमारी तरफ से भारतीय कंपनियों को मिन्स्क इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, लिस्टोपैड में हिस्सा लेने के लिए बुलाया जाता है, जो हर साल नवंबर महीने में होता है। फिर हमारे डेलीगेशन्स का एक्सचेंज होता है। हम दोनों देशों में फिल्मों की स्क्रीनिंग करते हैं।"
उन्होंने कहा कि हम दोनों देशों में फिल्मों की स्क्रीनिंग करते हैं। भारतीय फिल्ममेकर लोकेशन वगैरह के लिए बेलारूस जाते हैं। हमारा मानना है कि यह देशों के बीच सहयोग के सबसे जरूरी स्तंभों में से एक है और हमें इस तरह के क्षेत्र को विकसित करना है।
ब्रिक्स और एससीओ जैसे समूहों में एक बड़े स्तर पर भारत की भूमिका और पश्चिमी देशों के साथ भारत के अच्छे संबंध को लेकर बेलारूस के कॉन्सुल जनरल ने कहा, "बेलारूस अब शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन का हिस्सा है, एक पूर्ण सदस्य है। और ब्रिक्स की बात करें तो हम एक साझेदार देश हैं। ब्रिक्स का सदस्य बनना पूर्ण सदस्यता की तरफ एक कदम है। अब हमारी प्राथमिकता है विदेश नीति में एशियाई देशों के साथ रहना। हम दोनों संगठन में शामिल होने में हमें समर्थन करने के भारत के रुख और पोजीशन की भी सराहना करते हैं।"
पश्चिमी देशों के बैन की वजह से यूरोप में बेलारूस के बहुत सारे ट्रेडिशनल ट्रेड रूट बंद हो गए हैं। ऐसे में बेलारूस भारत के साथ अपनी दोस्ती का इस्तेमाल करके नए बिजनेस और डिप्लोमैटिक पार्टनर ढूंढने की प्लानिंग कर रहा है। इसे लेकर अलियाक्सांद्र मात्सुको ने कहा, "हां, इस मामले में भारत पश्चिमी देशों के दबाव का मुकाबला करने के लिए हमारे देश का बहुत समर्थन करता है और हम इस मामले में भारत सरकार के बहुत शुक्रगुजार हैं और देश का समर्थन हमारे लिए बहुत जरूरी है। हम इसकी बहुत सराहना करते हैं।"
जब उनसे पूछा गया कि आपके देश में पोटाश फर्टिलाइजर है, जिसे भारतीय किसान अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करते हैं। ग्लोबल पेमेंट ब्लॉक की वजह से दोनों देश शिपिंग को कैसे ठीक करने और रुपया-रूबल सिस्टम जैसे डायरेक्ट पेमेंट ऑप्शन सेट अप करने की कोशिश कर रहे हैं तो अलियाक्सांद्र मात्सुको ने कहा कि दोनों सरकारें इस मुद्दे को सुलझाने में दिलचस्पी रखती हैं।
मेक इन इंडिया अलाइनमेंट की बात करें तो बेलारूस के पास हेवी इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग में वर्ल्ड-क्लास एक्सपर्टीज है, जिसमें हेवी-ड्यूटी माइनिंग ट्रक और मशीनरी शामिल हैं। बायोसेलर रिलेशनशिप से जॉइंट वेंचर में बदलने की योजना को लेकर उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है जिसका मार्केट कभी खत्म नहीं होता। इसीलिए मेरा मानना है कि सबसे उम्मीद वाला क्षेत्र तकनीक के ट्रांसफर या जॉइंट वेंचर के मामले में कुछ ऐसा ही है। यह हमारे बीच करने के लिए सबसे अच्छी चीजों में से एक हो सकता था। डिफेंस के नजरिए से, दोनों देशों के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में सैन्य तकनीकी के अंतरिम नतीजों को बताते हुए बातचीत की है।
--आईएएनएस
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