Aapka Rajasthan

पद्मश्री से सम्मानित होंगे हीमोफीलिया और कैंसर विशेषज्ञ, कहा- 'पूरे चिकित्सा समुदाय की है उपलब्धि'

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार, 25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। भारत सरकार ने 25 जनवरी को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। इस बार दो प्रमुख हेल्थकेयर विशेषज्ञों, डॉ. सुरेश हनगवाड़ी और डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी को पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा।
 
पद्मश्री से सम्मानित होंगे हीमोफीलिया और कैंसर विशेषज्ञ, कहा- 'पूरे चिकित्सा समुदाय की है उपलब्धि'

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार, 25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। भारत सरकार ने 25 जनवरी को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। इस बार दो प्रमुख हेल्थकेयर विशेषज्ञों, डॉ. सुरेश हनगवाड़ी और डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी को पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा।

दावणगेरे (कर्नाटक) के डॉ. सुरेश हनगवाड़ी हीमोफीलिया के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान पा रहे हैं। वहीं हैदराबाद (तेलंगाना) के डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी कैंसर (ऑन्कोलॉजी) के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्म श्री प्राप्त कर रहे हैं।

डॉ. सुरेश हनगवाड़ी ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, "मुझे प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार पाकर सचमुच बहुत खुशी हो रही है। हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जो कम लोगों में होती है लेकिन इसका इलाज बहुत महंगा है। इस क्षेत्र में मेरी सेवा को पहचान मिलना मेरा सौभाग्य है।"

उन्होंने भारत सरकार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री और पूरे मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया। डॉ. हनगवाड़ी ने कहा, "हीमोफीलिया से पीड़ित अधिकांश बच्चे किशोरावस्था तक पहुंचते-पहुंचते विकलांग हो जाते हैं। लेकिन यह विकलांगता रोकी जा सकती है। प्रोफिलैक्टिक इलाज और नॉन-फैक्टर थेरेपी जैसे नए उपचार उपलब्ध कराने से खून न बहने की स्थिति बनाई जा सकती है, जिससे जोड़ों को नुकसान नहीं पहुंचेगा और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी।"

डॉ. हनगवाड़ी ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चे स्कूल की गैर-हाजिरी के कारण पिछड़ जाते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि आरपीडब्ल्यूडी एक्ट के तहत इन बच्चों को नौकरियों में आरक्षण दिया जाए, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

उन्होंने यह पुरस्कार पूरे हीमोफीलिया समुदाय, अपने ‘ब्लड ब्रदर्स’, छात्रों और उन सभी लोगों को समर्पित किया जिन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने में योगदान दिया।

वहीं, हैदराबाद के प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी ने सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मैं भारत सरकार द्वारा मुझे दिए गए इस अत्यंत प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान को स्वीकार करता हूं। इस पुरस्कार को पाकर मैं अत्यंत विनम्र और सम्मानित महसूस कर रहा हूं।"

डॉ. रेड्डी ने कहा कि यह पुरस्कार न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा की पहचान है, बल्कि पूरे देश के ऑन्कोलॉजी समुदाय, उनके मरीजों, मार्गदर्शकों, शिक्षकों और परिवार की भी उपलब्धि है, जिन्होंने उनकी पूरी यात्रा में साथ दिया।

पद्म श्री देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, सामाजिक कार्य और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। इस वर्ष के सम्मानित व्यक्तियों में डॉ. सुरेश हनगवाड़ी और डॉ. पी. विजय आनंद रेड्डी जैसे क्षेत्रीय चिकित्सकों का चयन दुर्लभ बीमारियों और कैंसर के इलाज में हो रहे नवाचारों को राष्ट्रीय मान्यता देता है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीएम