वैश्विक व्यवस्था में सेतु बनाने और संतुलन रखने वाला उभरता हुआ देश: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। भारत दुनिया के मौजूदा मामलों में एक अहम 'ब्रिज-बिल्डर' और 'संतुलन' बनाए रखने वाला देश बन गया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास कमजोर हो रही वैश्विक व्यवस्था को फिर से आकार देने की क्षमता है और वह इसे ज्यादा न्यायपूर्ण वैश्विक शासन की दिशा में ले जा सकता है।
दक्षिण अफ्रीका के अखबार ‘संडे इंडिपेंडेंट’ में लिखे एक ओपिनियन लेख में द सेंटर फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिकल एंड इकोनॉमिक थॉट के चेयरपर्सन फापनानो फाशा ने कहा कि 'कोएलिशन ऑफ द विलिंग' यानी इच्छुक देशों का एक समूह, जो इस व्यवस्था को स्थिर करने में मदद कर सकता है, उसमें क्वाड भी शामिल है। क्वाड में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत शामिल हैं।
हालांकि, भारत ने क्वाड को एक औपचारिक सैन्य गठबंधन बनाने से इनकार किया है, ताकि वह अपनी लचीलापन और स्वतंत्र नीति बनाए रख सके।
इसी वजह से भारत आज वैश्विक मामलों में एक ऐसा देश बनकर उभरा है जो अलग-अलग देशों के बीच सेतु का काम करता है और संतुलन बनाए रखता है। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति पर चलता है, जो उसके गैर-गठबंधन आंदोलन (एनएएम) की विरासत से जुड़ी है। इस नीति के तहत भारत बिना किसी औपचारिक गठबंधन में बंधे कई मंचों पर काम करता है। इससे भारत अपने राष्ट्रीय हित भी आगे बढ़ा पाता है और साथ ही ग्लोबल साउथ की आवाज भी बनता है, और पश्चिमी देशों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार भी बना रहता है।
वैश्विक संस्थाओं के कमजोर होने के इस समय में भारत के लिए एक बड़ा अवसर बना है। अपनी बड़ी अर्थव्यवस्था, वैश्विक मौजूदगी और रणनीतिक रिश्तों की वजह से भारत की भूमिका और भी अहम हो गई है। भारत विकासशील देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करके और साउथ-साउथ सहयोग को बढ़ावा देकर ग्लोबल साउथ में नेतृत्व कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ भारत यूरोपीय संघ, यूके और नॉर्डिक देशों के साथ भी अच्छे संबंध रखकर पश्चिम का महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है।
भारत की यह अनोखी स्थिति उसे उत्तर और दक्षिण के बीच एक पुल की तरह काम करने की क्षमता देती है। गैर-गठबंधन आंदोलन (एनएएम) के समय से ही भारत वैश्विक शासन और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन पर बातचीत को आगे बढ़ाता आया है।
क्वाड के जरिए भी भारत बहुध्रुवीय दुनिया में एक स्थिरता लाने वाली भूमिका निभाता है, जहां वह साझेदारियों, कानून के शासन और बड़े शक्तिशाली देशों जैसे अमेरिका, रूस, चीन और यूरोपीय देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है, साथ ही ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज भी बनता है।
यह 'ब्रिज-बिल्डिंग' की भूमिका खासकर दक्षिण अफ्रीका और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है, क्योंकि यह एक ज्यादा न्यायपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की उनकी उम्मीदों से मेल खाती है। यह विचार ब्रिक्स जैसे मंचों के साथ भी जुड़ता है, जहां भारत ने 2026 में अध्यक्षता संभाली है।
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता 'मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण' थीम के साथ कर रहा है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बताए गए मानव-केंद्रित और मानवता-प्रथम विचारों को दर्शाता है।
--आईएएनएस
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