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वैश्विक अस्थिरता के बीच मुक्त व्यापार समझौते भारत की अर्थव्यवस्था को कर रहे सपोर्ट: प्रांजुल भंडारी

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। एचएसबीसी में भारत के लिए मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने मंगलवार को कहा कि भारत की औसत विकास दर बीते 12 वर्षों में 6-6.5 प्रतिशत के बीच में रही है और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौते देश को वैश्विक अस्थिरता के दौर में मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
 
वैश्विक अस्थिरता के बीच मुक्त व्यापार समझौते भारत की अर्थव्यवस्था को कर रहे सपोर्ट: प्रांजुल भंडारी

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। एचएसबीसी में भारत के लिए मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने मंगलवार को कहा कि भारत की औसत विकास दर बीते 12 वर्षों में 6-6.5 प्रतिशत के बीच में रही है और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौते देश को वैश्विक अस्थिरता के दौर में मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए भंडारी ने कहा कि हमने कई विकसित देशों से ट्रेड डील साइन की हैं, इससे भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बढ़ोतरी होगी। इससे हम और मैन्युफैक्चर कर पाएंगे और ज्यादा निर्यात कर सकेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि दुनिया चीन प्लस वन रणनीति के तहत विविधता ला रही है और व्यापार के लिए नए साथी और नई जगहों की तलाश कर रही है। यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है।

इस साल आर्थिक विकास के बारे में भंडारी ने कहा कि यह सप्लाई शॉक और एनर्जी शॉक का साल है, और बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है।

भंडारी ने ​​कहा, "कुछ महीनों में हम 'अल नीनो शॉक' के बारे में भी सुनेंगे, जिसके अगले कुछ महीनों में आने की संभावना है। इसलिए, अगर आपको दोहरे झटके - एनर्जी शॉक और अल नीनो क्लाइमेट शॉक - का सामना करना पड़े, तो ऐसे साल में बहुत तेजी से विकास करना मुश्किल होता है और यह सिर्फ भारत के लिए नहीं है। मुझे लगता है कि यह दुनिया भर के सभी देशों के लिए है।"

उन्होंने आगे कहा कि सभी देशों को दो सप्लाई शॉक के बीच होने की कीमत चुकानी होगी।

अर्थशास्त्री ने कहा, "दो झटके एक साथ आ रहे हैं,इस कारण वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की ग्रोथ का हमारा अनुमान 6 प्रतिशत है। हमें अभी तक डेटा में ग्रोथ पर पड़ने वाला झटका दिखाई नहीं दिया है क्योंकि इसे दिखने में कुछ समय लगता है। लेकिन मुझे लगता है कि सितंबर तिमाही से शुरू होकर, लगभग दो से तीन तिमाहियों तक ग्रोथ में काफी कमी आ सकती है, क्योंकि हम ऊर्जा और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में उछाल का सामना कर रहे हैं।"

--आईएएनएस

एबीएस