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'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य हासिल करने में समाज और विधायक अहम: विजेंद्र गुप्ता

चंडीगढ़, 9 जून (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने और 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य हासिल करने के लिए जागरूक समाज और विधायक बहुत जरूरी हैं।
 
'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य हासिल करने में समाज और विधायक अहम: विजेंद्र गुप्ता

चंडीगढ़, 9 जून (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने और 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य हासिल करने के लिए जागरूक समाज और विधायक बहुत जरूरी हैं।

हरियाणा विधानसभा में आयोजित कॉमनवेल्थ संसदीय बैठक में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अगर नागरिक लोकतांत्रिक सतर्कता बरतते हैं तो विधायकों को लोकतांत्रिक दिशा देनी चाहिए। अगर समाज उम्मीद जगाता है तो संस्थानों को उन उम्मीदों को नतीजों में बदलना चाहिए।

कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीजन जोन-II कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन प्लेनरी सेशन-II को संबोधित करते हुए दिल्ली विधानसभा के स्पीकर ने भविष्य की चुनौतियों और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में जागरूक समाज और विधायकों की भूमिका विषय पर अपने विचार रखे।

उन्होंने दोहराया कि विकसित भारत 2047 की अंतिम सफलता एक सरल, लेकिन शक्तिशाली तालमेल पर निर्भर करती है, जिसमें एक जागरूक समाज जिम्मेदारी से भाग लेता है और विधायिकाएं अटूट ईमानदारी, दूरदर्शिता और भविष्य की समझ के साथ प्रतिक्रिया देती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के नाते बहुत आत्मविश्वास के साथ इस अहम यात्रा पर निकल रहा है।

उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी, स्पेस टेक्नोलॉजी और पब्लिक सर्विस डिलीवरी में देश की क्रांतिकारी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

गुप्ता ने अभूतपूर्व सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजरते हुए भी अपने लोकतांत्रिक संस्थानों की पवित्रता और मजबूती को बनाए रखने की भारत की क्षमता की सराहना की।

अगले दो दशकों की ओर देखते हुए स्पीकर ने उन अहम चुनौतियों का जिक्र किया जिनके लिए सक्रिय विधायी दूरदर्शिता की जरूरत है।

उन्होंने चेतावनी दी कि 21वीं सदी की विधायिकाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती हुई तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव से निपटने, खेती और जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर असर का सामना करने, साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरों का मुकाबला करने और तेजी से शहरीकरण के कारण बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव को संभालने के लिए तैयार रहना होगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना होगा कि युवा आबादी ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए कुशल बने।

इन बाधाओं पर बात करते हुए गुप्ता ने जागरूक समाज को प्रगति का पहला अनिवार्य स्तंभ बताया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं पनपता, बल्कि तब पनपता है जब नागरिक सक्रिय रूप से गलत सूचनाओं का मुकाबला करते हैं, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं और अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहते हैं।

दूसरे स्तंभ विधायिका की ओर बढ़ते हुए गुप्ता ने व्यापक संस्थागत सुधार का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कानून बनाने वाली संस्थाएं अतीत के तरीकों का इस्तेमाल करके भविष्य की चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकतीं।

नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन जैसी आधुनिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने दिल्ली विधानसभा के अनुभव साझा किए कि कैसे तकनीकी नवाचार नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार कानून बनाने वाली संस्थाएं बना सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही डिजिटल टूल्स और डेटा गवर्नेंस में मदद करें, लेकिन वे कभी भी समझदारी, इंसानी जवाबदेही और संसदीय लोकतंत्र की मुख्य विचार-विमर्श वाली भावना की जगह नहीं ले सकते।

--आईएएनएस

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