सीएम विजय से मिलेंगे अंबुमणि, 69 प्रतिशत आरक्षण नीति की सुरक्षा के लिए जाति जनगणना की करेंगे मांग
चेन्नई, 9 जून (आईएएनएस)। पीएमके के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास मंगलवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मिलकर राज्य में जाति-आधारित जनगणना की मांग करेंगे। पार्टी का कहना है कि तमिलनाडु की 69 प्रतिशत आरक्षण नीति की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी है।
यह बैठक 5 जून को चेन्नई के टी. नगर में पट्टली मक्कल काची (पीएमके) द्वारा आयोजित सर्वदलीय और सामुदायिक नेताओं के सम्मेलन के बाद हो रही है। सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें राज्य सरकार से 'कलेक्शन ऑफ स्टैटिस्टिक्स एक्ट, 2008' के प्रावधानों के तहत जाति जनगणना कराने का आग्रह किया गया।
इस कवायद को 'सामाजिक न्याय जनगणना' बताया गया, जिसका उद्देश्य जाति-वार जनसंख्या का अपडेट डेटा तैयार करना है।
पीएमके नेताओं ने कहा कि अंबुमणि सम्मेलन में पारित प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करेंगे।
पार्टी का तर्क है कि तमिलनाडु के आरक्षण ढांचे को कानूनी और संवैधानिक रूप से बनाए रखने के लिए जाति संबंधी अपडेट डेटा आवश्यक है।
तमिलनाडु में देश की सर्वाधिक आरक्षण व्यवस्थाओं में से एक प्रभावी है, जिसके अंतर्गत पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को 69 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।आरक्षण नीति को 1993 में पारित विशेष कानून के माध्यम से संरक्षित किया गया था और बाद में 76वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संविधान की नौवीं अनुसूची में रखा गया था। हालांकि, यह मुद्दा समय-समय पर फिर से उठता रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी फैसले ने असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय कर दी थी।
जाति जनगणना के समर्थकों का तर्क है कि जनसंख्या के अपडेटेड आंकड़े राज्य के आरक्षण ढांचे के लिए ठोस आधार प्रदान करेंगे और भविष्य की कानूनी चुनौतियों के खिलाफ इसका बचाव करने में मदद करेंगे।
कई राज्यों में इस मांग ने जोर पकड़ा है, और राजनीतिक दल कल्याणकारी और सकारात्मक कार्रवाई नीतियों को दिशा देने के लिए जाति-आधारित गणना की मांग कर रहे हैं।
यह पहल पीएमके के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर भी आई है, जो पार्टी के संस्थापक डॉ. एस. रामदास और उनके बेटे अंबुमणि रामदास के बीच आंतरिक नेतृत्व संघर्ष का सामना कर रही है। संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी की भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर मतभेदों के कारण हाल के महीनों में सार्वजनिक असहमति सामने आई है, जिससे वन्नियार-आधारित पार्टी के भीतर विभाजन उजागर हुआ है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अंबुमणि का नया जोर पीएमके के पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत करने के साथ-साथ चल रहे पारिवारिक और संगठनात्मक विवाद के बीच अपना नेतृत्व स्थापित करने के उद्देश्य से है।
तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में आरक्षण के मुद्दे के महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय के साथ उनकी बैठक के परिणाम पर बारीकी से नजर रखे जाने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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