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बर्फीले सीमावर्ती इलाके में सैन्य वीरता के साथ विकास की नई कहानी

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर के तंगधार में शौर्य से विकास की नई गाथा लिखी जा रही है। यहां कुपवाड़ा जिले में साधना पास के समीप शमशाबरी रिज पर भारतीय सेना ने ‘शौर्य गाथा’ कॉम्प्लेक्स विकसित किया है। यह कॉम्प्लेक्स वीरता, संस्कृति, पर्यटन और जनसेवा का अनूठा संगम बनकर उभरा है।
 
बर्फीले सीमावर्ती इलाके में सैन्य वीरता के साथ विकास की नई कहानी

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर के तंगधार में शौर्य से विकास की नई गाथा लिखी जा रही है। यहां कुपवाड़ा जिले में साधना पास के समीप शमशाबरी रिज पर भारतीय सेना ने ‘शौर्य गाथा’ कॉम्प्लेक्स विकसित किया है। यह कॉम्प्लेक्स वीरता, संस्कृति, पर्यटन और जनसेवा का अनूठा संगम बनकर उभरा है।

सीमावर्ती क्षेत्र में तैयार किया गया यह कॉम्प्लेक्स देश के ‘फर्स्ट विलेजेज’ यानी सीमा से सटे गांवों को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है। भारतीय सेना के शौर्य गाथा कॉम्प्लेक्स में एक साधना कैफे बनाया गया है। यहां पहाड़ी सांस्कृतिक केंद्र और युद्ध स्मारक एवं संग्रहालय को भी शामिल किया गया है।

यानी यहां आने वाले पर्यटक अब सिर्फ खूबसूरत वादियों का आनंद ही नहीं लेंगे, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों के साहस, संघर्ष और बलिदान की कहानियों को भी करीब से महसूस कर सकेंगे। युद्ध संग्रहालय में वीर सैनिकों की गाथाएं और सैन्य इतिहास को बेहद आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

जम्मू और कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में स्थित साधना दर्रा एक रणनीतिक इलाका होने के साथ-साथ काफी खूबसूरत पर्वतीय क्षेत्र है। यह पर्वत शृंखला 10 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। गौरतलब है कि बर्फ से ढकी शमशाबरी रिज के सामने साधना पास स्थित है। इस दुर्गम क्षेत्र में सीमाओं की रक्षा में तैनात भारतीय सैनिक तैनात हैं। इसी वीरभूमि तंगधार में शौर्य, संस्कृति और विकास की यह नई कहानी लिखी जा रही है।

दरअसल इस दुर्गम क्षेत्र में बनाया शौर्य गाथा कॉम्प्लेक्स देशभक्ति, बलिदान और जनसेवा का जीवंत प्रतीक बन गया है। सेना के मुताबिक भारत रणभूमि दर्शन पहल के तहत विकसित यह परियोजना सीमावर्ती गांवों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। सेना का उद्देश्य यहां पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना है। पहाड़ी संस्कृति, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और पारंपरिक जीवनशैली को भी इससे नई पहचान मिलेगी।

यानी अब तंगधार सिर्फ एक सीमावर्ती इलाका नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। सेना के अनुसार इस कॉम्प्लेक्स में बनाया गया हेलिपैड भी स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। खराब मौसम और कठिन रास्तों वाले इस क्षेत्र में अब आपातकालीन सेवाएं और राहत कार्य पहले से अधिक तेज और प्रभावी हो सकेंगे। यह शौर्य गाथा दिखाती है कि भारतीय सेना सिर्फ देश की सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि सीमावर्ती लोगों के जीवन में विकास और उम्मीद की नई रोशनी भी लाती है। तंगधार की यह पहल सचमुच शौर्य और सेवा की भावना को साकार करती नजर आती है।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएस