बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री और उनकी पत्नी पर करोड़ों की ठगी का आरोप, शिकायतकर्ता बोले- जांच की जाए
कोलकाता, 9 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में राज्य के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी के खिलाफ वित्तीय घोटाले की शिकायत की गई है। वर्ष 2022 से कोलकाता के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों में टिकटों की बिक्री के नाम पर करोड़ों की अवैध कमाई की शिकायत इसमें की गई है।
शिकायतकर्ता जयदीप मुखोपाध्याय ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मासआर्ट संस्थान की ओर से वर्ष 2022, 2023 और 2024 में कोलकाता दुर्गा पूजा को डिवाइड कर दिया गया। ब्रांडिंग कंपनी से पैसा ले लिया गया। टूरिज्म और कल्चर मंत्रालय से पैसा लिया गया। यह सबसे बड़ा घोटाला है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को की ओर से वर्ष 2021 में कोलकाता के दुर्गा पूजा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था।
जयदीप मुखोपाध्याय ने आगे कहा कि वर्ष 2022 में अचानक से मासआर्ट कंपनी सामने आई। बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन की पत्नी मधुचंद्रा सेन इस कंपनी की अध्यक्षा हैं। मधुचंद्रा सेन के साथ चार से पांच और लोगों के खिलाफ हमने शिकायत की है। इन लोगों की ओर से बताया गया कि यूनेस्को इनके साथ पार्टनर है।
जयदीप मुखोपाध्याय ने कहा कि इन लोगों की ओर से बताया गया कि कोलकाता में 24 दुर्गा पूजा पंडाल को चुना जाएगा। उस पूजा पंडाल में 3 से 4 हजार रुपए का टिकट लेकर लोगों को अंदर जाने दिया जाएगा। इस तरह का करप्शन शुरू किया गया था।
उन्होंने कहा कि जब हमने यूनेस्को से इसके बारे में पूछा तो यूनेस्को की ओर से लिखित में 18 सितंबर 2025 को बताया गया कि किसी मासआर्ट संस्थान के साथ इस तरह का कोई एग्रीमेंट नहीं किया गया है। इसी घोटाले को लेकर मैंने सोमवार को पुलिस से शिकायत की है। इससे पहले मैंने मुख्यमंत्री को भी पूरे डॉक्यूमेंट्स के साथ शिकायत पत्र दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह बहुत बड़ा फाइनेंशियल और आर्ट स्कैम है।
जयदीप मुखोपाध्याय ने आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली सरकार को इसके बारे में पूरी जानकारी थी। टीएमसी की सरकार में धमकी देने वाला कल्चर था, इसलिए मैंने उस वक्त किसी से कुछ नहीं बोला। अब मैं पूरी तरह से इस मामले की जांच की मांग करता हूं। दुर्गा पूजा को लेकर सेंटीमेंट को मार दिया गया।
शिकायतकर्ता मुखोपाध्याय ने आईएएनएस से कहा कि मासआर्ट की ओर से बताया गया कि 24 पूजा पंडालों को यूनेस्को की ओर से सेलेक्ट किया गया है। यूनेस्को के नाम की वजह से लोगों के दिमाग में यही चल रहा था कि देखने जाना चाहिए। जब लोग पहुंचने लगे तो उनको पंडाल में जाने नहीं दिया गया, क्योंकि उनके पास पंडाल के अंदर जाने का पास नहीं था। एक शख्स व्हीलचेयर पर गया तो उसको भी पंडाल में जाने नहीं दिया गया।
सगुना मुखोपाध्याय ने कहा कि दुर्गा पूजा हमारी आस्था और संस्कृति है। क्या हम लोग दुर्गा पूजा को ही बेच देंगे? उनके ऐसा करने से बंगाली समुदाय और देश की बेइज्जती हुई। यूनेस्को का नाम लेकर इस तरह का काम किया गया तो क्या इससे बंगाली समुदाय, बंगाल और देश की बेइज्जती नहीं हुई? यही वजह है कि हमने सरकार से भी रिक्वेस्ट किया है कि इस मामले की पूरी तरह से जांच की जाए।
--आईएएनएस
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