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कोटा में PWD के क्वालिटी कंट्रोल विंग में 15 लाख के गबन का मामला, तत्कालीन कैशियर और अफसरों की भूमिका पर उठे सवाल

 
कोटा में PWD के क्वालिटी कंट्रोल विंग में 15 लाख के गबन का मामला, तत्कालीन कैशियर और अफसरों की भूमिका पर उठे सवाल

सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के क्वालिटी कंट्रोल विंग में सामने आए करीब 15 लाख रुपए के गबन मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में तत्कालीन कैशियर और पूर्व अधिकारियों की भूमिका को लेकर महकमे में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन कैशियर अब्दुल समद पर चालानों के सत्यापन में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि उन्होंने न तो संदिग्ध और फर्जी चालानों की प्रभावी जांच की और न ही विभाग के खाते में जमा होने वाले टेस्टिंग शुल्क की नियमित रूप से पुष्टि की। आरोप है कि बिना उचित सत्यापन के कई चालानों को रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया।

बताया जा रहा है कि क्वालिटी कंट्रोल विंग में विभिन्न निर्माण सामग्री की जांच के बदले जमा होने वाले टेस्टिंग चार्ज से जुड़े दस्तावेजों की निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर थी। ऐसे में गबन का मामला सामने आने के बाद विभाग के कई स्तरों पर जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और इसमें किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वित्तीय अनियमितताओं को समय रहते क्यों नहीं पकड़ा जा सका।

विभागीय सूत्रों का मानना है कि यदि चालानों और शुल्क जमा होने की प्रक्रिया का नियमित सत्यापन किया जाता तो इस प्रकार की अनियमितता को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि 15 लाख रुपए के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अब सभी की नजरें जांच के निष्कर्षों और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।