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Dungarpur हाथरस में हादसे के हालात बेणेश्वर में न बने, सुरक्षा पर देना होगा ध्यान

 
Dungarpur हाथरस में हादसे के हालात बेणेश्वर में न बने, सुरक्षा पर देना होगा ध्यान
डूंगरपुर न्यूज़ डेस्क, डूंगरपुर बेणेश्वर धाम पर चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए यहां तीन पुल साबला-बेणेश्वर, बेणेश्वर वलाई और बेणेश्वर-गनोड़ा बने हुए हैं। लेकिन, इन पुलों की ऊंचाई कम होने के साथ ही चौड़ाई भी बमुश्किल 10-12 फीट ही है। इतना ही नहीं इन पुलों की सुरक्षा वॉल तक नहीं है। माघ पूर्णिमा के मुख्य मेले के दिन सुबह से शाम तक तीनों पुल श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहते हैं। आवाजाही में काफी दिक्कत होती हैं। सुरक्षा वॉल नहीं होने से कई बार श्रद्धालु पुल से नीचे गिर कर चोटिल भी हो जाते हैं। इस दौरान यदि जनप्रतिनिधि, पुलिस या प्रशासन का कोई वाहन गुजरता है, तब अफरा-तफरी मच जाती है।

दरअसल आदिवासियों के महाकुंभ बेणेश्वर धाम मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान तीन राज्यों का केन्द्र बिन्दु हैं। यहां प्रति वर्ष पौष पूर्णिमा की पदयात्रा एवं माघ पूर्णिमा के मुख्य मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। इसके इतर वोट बैंक के जरिये के तौर पर राजनीतिक दल चुनावी दौर में सभाएं करते हैं, जिसमें भी बड़ी संख्या में भीड़ जुटती है। हालात ये बन जाते हैं कि आवाजाही के दौरान धाम को जोड़ने वाले तीन संपर्क पुलों पर अफरा-तफरी मच जाती है। इसके बावजूद यहां सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। खास बात यह भी है कि संभाग के सबसे बड़े माही बांध के गेट खोलने के दौरान धाम बरसाती मौसम में कई बार टापू में तब्दील हो जाता है। इस दौरान भी यहां फंसने वाले लोगों की सुरक्षा सहित अन्य प्रबंध नहीं होने से कई दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ती है।

कार्य गति पकड़े काम, तो बनें बात

गत प्रदेश सरकार ने बेणेश्वर धाम के लिए 132 करोड़ रुपए के हाइ-लेवल पुल की घोषणा की थी। इस पर 16 मई 2022 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुल के शिलान्यास की आधारशिला रखी थी। फिलहाल दो पुलों का कार्य चल रहा है। लेकिन, यह कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है। पुल कार्य जल्द पूर्ण होगा, तो समस्याओं का अंत होगा। बेणेश्वर धाम पर प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री, मंत्रियों के दौरे होने के बावजूद मेले, सभाओं, बरसाती मौसम में सुरक्षा को लेकर स्थायी प्रबंध आज तक नहीं हो पाए हैं। यह बात दीगर है कि धाम पर अस्थायी पुलिस चौकी जरूर है। लेकिन, आपात स्थितियों में तात्कालिक सुविधाओं के संसाधन नहीं हैं। ताज्जुब इस बात का है कि विशेष अवसरों को छोड़कर वर्ष पर्यन्त धाम की व्यवस्थाओं की सुध तक नहीं ली जाती है। इधर, धाम पर पुलिस चौकी भी महज एक कार्मिक के भरोसे ही है। वो भी साबला थाने में ड्यूटी की वजह से यहां नियमित सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में कई बार दिक्कत आती है। बेणेश्वर शिवालय ट्रस्ट के अध्यक्ष बलवंतसिंह वालाई ने बताया कि सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था नहीं होने से कई दिक्कते आती है। इस पर ध्यान देना जरूरी है।

महंत ने कहा: व्यवस्थाएं जरूरी

बेणेश्वर मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं।आपात स्थितियों से निपटने के लिए किसी प्रकार के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। मेला, सभा व बरसात के दौर में पुख्ता सुरक्षाओं को लेकर व्यवस्थाएं होनी चाहिए। धाम पर हाइलेवल पुल का कार्य चल रहा है। इस पुल के शुरू होने के साथ ही पुराने पुल हैं, उनको भी शुरू रखा जाना जरूरी है ताकि एक ही पुल पर श्रद्धालुओं का भार नहीं बढ़े।