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Bikaner सहित राजस्थान के कई स्कूलों के बिगड़े हालात, 16 हजार स्कूलों में प्रिंसिपल के 44%, व्याख्याता सेकंड ग्रेड के 21% पद खाली
 

बीकानेर न्यूज़ डेस्क, शैक्षणिक सत्र के दौरान तबादलों से बिगड़े स्कूलों के समीकरण, गांवों में रोजाना लॉकडाउन
कोरोना के बाद स्कूलों में फिर से बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू हो गया है। लेकिन ग्रामीण अंचलों में टूटी व्यवस्था के कारण बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। प्रदेश के 16,000 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में इस समय प्राचार्यों के 44 प्रतिशत और व्याख्याता एवं द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के 21 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वहीं, बोर्ड परीक्षा के बाद सेमेस्टर के बीच में करीब 10,000 शिक्षकों का तबादला प्राचार्य से दूसरी कक्षा में कर दिया गया।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात गड़बड़ा गया है। साथ ही कई शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। मजबूर होकर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। नए सत्र में ही शिक्षकों के रिक्त पदों को भी भरा जाएगा। प्रमुख पदों पर सीधी भर्ती का कोई प्रावधान नहीं है। सभी पद पदोन्नति से ही भरे जाने हैं। लेकिन 2022-23 की डीपीसी अभी तक नहीं हुई है। व्याख्याताओं की एक भी सेकेंड स्टैंडर्ड और डीपीसी भी दो साल से अटकी हुई है। व्याख्याताओं की नई भर्ती अक्टूबर में और द्वितीय श्रेणी दिसंबर में प्रस्तावित है। नई भर्ती परीक्षा के बाद काउंसलिंग और पोस्टिंग में करीब 5 से 6 महीने का समय लगेगा। ऐसे में बच्चों को अब नए सत्र में ही शिक्षक मिल सकेंगे।

अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को इंटरव्यू के बाद भी नहीं मिले व्याख्याता
चार साल पहले प्रदेश के 33 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में जिला मुख्यालय पर शैक्षणिक सत्र 2019-20 में 11वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले विज्ञान विषय के छात्रों को एक माह बाद भी व्याख्याता नहीं मिला। इन स्कूलों में व्याख्याता के 132 पदों के लिए दो चरणों की साक्षात्कार प्रक्रिया पिछले महीने पूरी हुई थी। लेकिन आज तक शिक्षा विभाग ने नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया है।

प्रदेश के स्कूलों में पदों का गणित
प्रिंसिपल
स्वीकृत 15376
कार्यरत 8611
रिक्त 6765
व्याख्याता
स्वीकृत 53881
कार्यरत 42242
रिक्त 11639
वरिष्ठ अध्यापक
स्वीकृत 75199
कार्यरत 59212
रिक्त 15987

अब कक्कू स्कूल में ताला, रोड जाम, सिर्फ 6 शिक्षकों वाले 942 छात्र, 50 से ज्यादा गांव के स्कूलों में यही हाल
45 किमी चलने के बाद बच्चों के पैरों में छाले पड़ गए, बीमार हो गए तो सोढ़ी के एक स्कूल में 6 शिक्षकों से मिले।
बीकानेर/कक्कू  लुनकरणसर की सोधावाली के बाद बुधवार को नाखा प्रखंड के कक्कू गांव के छात्रों ने तालाबंदी कर दी। रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर शिक्षकों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। आलम यह है कि स्कूल में 924 छात्रों में से महज छह शिक्षक हैं। प्राचार्य भी नहीं। कक्कू के अलावा कलायत में चानी के 50 से अधिक गांव, श्रीडूंगरगढ़ में अडासर, बज्जू में भुलेरी, पुगल, खाजूवाला का भी यही हाल है। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।

उधर, शिक्षा विभाग ने सेधवाली गांव में प्राचार्य, प्रधानाध्यापक समेत छह शिक्षकों के नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। उपमंडल अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बुधवार को छात्रों व ग्रामीणों को नियुक्त करने के आदेश से बिछवाल पहुंचे और उन्हें आंदोलन समाप्त करने के लिए समझाया। बच्चों ने कहा कि शिक्षकों के शामिल होने के बाद ही स्कूल का ताला खुलेगा। सत्र के बीच में किसी भी शिक्षक को नहीं बदला जाएगा।

सभी रिक्तियों को भरा जाएगा। भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह शेखावत ने मध्यस्थता की। डीईओ सुरेंद्रसिंह भाटी ने बताया कि स्कूल में प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल के साथ दो शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया गया है, जबकि दो अन्य शिक्षक जो कहीं और प्रतिनियुक्ति पर थे, उन्हें भी वापस सोधावाली भेज दिया गया है. इन छह शिक्षकों के बाद भी स्कूल में सात पद रिक्त हैं। उल्लेखनीय है कि सेधवाली स्कूल के 150 छात्र मंगलवार सुबह शिक्षकों की मांग को लेकर बीकानेर गए थे. करीब 45 किमी पैदल खारा पहुंचने के बाद शिक्षा विभाग जाग गया और शिक्षकों के पदस्थापन आदेश जारी कर दिए गए।