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Ajmer पीएमआर, टीबी और चेस्ट एंड इमरजेंसी मेडिसिन कोर्स का होगा विलय!

 
Ajmer पीएमआर, टीबी और चेस्ट एंड इमरजेंसी मेडिसिन कोर्स का होगा विलय!

अजमेर न्यूज़ डेस्क, अजमेर नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से क्लिनिकल बेस्ड शिक्षा 2023-24 के तहत पीएमआर, टीबी एंड चेस्ट, इमरजेंसी मेडिसिन को एमबीबीएस में अलग से विषय के रूप में शामिल नहीं करने का निर्णय किया गया है। एमबीबीएस में अलग से विषय नहीं होकर इन्हें अन्य प्रमुख विषयों के साथ ही पढ़ाया जाएगा, ताकि बच्चों पर अनावश्यक भार नहीं पड़े। पीजी में यह सभी अलग से विषय के रूप में होते हैं।

इसलिए भी जरूरी पीएमआर पाठ्यक्रम

देश के 2.5 प्रतिशत (2.5-3 करोड़) लोग किसी न किसी विकलांगता से ग्रसित हैं। इनके लिए भी प्रधानमंत्री ने सुलभ भारत अभियान (असेंसिबल इंडिया) जैसी योजनाएं बनाई हैं। यही नहीं सचिवालय और मिनिस्ट्री में भी विकलांग लोगों के हितार्थ अलग आयोग है। ऐसे में एक एमबीबीएस चिकित्सक का विकलांगों और उनकी विशेष समस्याओं के लिए समर्पित विभाग की सम्पूर्ण जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। अजमेर. नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से एमबीबीएस पाठ्यक्रम से भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर), टीबी एंड चेस्ट तथा इमरजेंसी मेडिसिन पाठ्यक्रम अन्य में मर्ज कर दिए गए हैं। अब एमबीबीएस में इन्हें अलग पाठ्यक्रम के रूप में नहीं पढ़ाया जाएगा।

नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से प्रमुख तीनों विभागों को एमबीबीएस के पाठ्यक्रम से हटाने को लेकर ना केवल मेडिकल स्टूडेंट बल्कि चिकित्सकों में भी निराशा का भाव पैदा हो गया है। जबकि इन तीनों ही विभागों से गंभीर मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं बेहतरीन मिलती रही हैं। चिकित्सा क्षेत्र में एनएमसी के निर्णय को लेकर भी चिंता जताई गई है। पीएमआर विभाग को ऑर्थोपेडिक एवं टीबी एंड चेस्ट को मेडिसिन विभाग में मर्ज कर दिया गया है। कोविड की महामारी में टीबी एंड चेस्ट एवं इमरजेंसी मेडिसिन शाखाओं के विशेषज्ञों ने जान पर खेलकर मरीजों को बचाया है। इन विभागों की मुख्य भूमिका रही है। ऐसे में इन विभागों को एमबीबीएस से हटाने का निर्णय घातक साबित होगा।