वजह जान लगेगा झटका
दिल्ली की एतिहासिक इमारत कुतुब मीनार की सैर करने से पहले उससे जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स के बारे में भी जान लीजिए। इसे पढ़कर कुतुब घूमने का मजा भी दोगुना होगा।
कुतुब मीनार का निर्माण 1199 से 1220 के दौरान हुआ था। इसे बनाने की शुरुआत कुतुबुद्दीन-ऐबक ने की थी, जिसे बाद में उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने पूरा किया था। हालांकि, तब कुतुब मीनार का दरवाजा खुला था, जिसे देखने के लिए लोग अंदर जाते थे।
कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है। इसमें 379 सीढ़ियां है, जो मीनार के शिखर तक पहुंचती हैं। जमीन पर इस इमारत का व्यास 14.32 मीटर है, जो शिखर तक पहुंचने पर 2.75 मीटर रह जाता है। इस इमारत की स्थापत्य कला देखने में भव्य लगती है।
क़ुतुब मीनार कई बड़ी ऐतिहासिक इमारतों से घिरा हुआ है और ये सभी कुतुब कंपलेक्स के अंतर्गत आती हैं। इस कांप्लेक्स में दिल्ली का लौह स्तंभ, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, अलाई दरवाजा, इल्तुतमिश की कब्र, अलाई मीनार, अलाउद्दीन का मदरसा और कब्र शामिल है।
कुतुब मीनार का ऊपरी हिस्सा बिजली गिरने की वजह से नष्ट हो गया था, जिसे फिरोजशाह तुगलक ने दोबारा बनवाया। बाद के समय के फ्लोर पहले के फ्लोर्स से काफी अलग हैं, क्योंकि यह सफेद संगमरमर के बने हैं।
बात सन 1974 की है, जब कुतुब मीनार में आम लोगों की एंट्री हुआ करती थी। 4 दिसंबर 1981 में लोगों के साथ एक भयानक हादसा हुआ, जिसके बाद अंदर भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में लगभग 45 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद कुतुब मीनार का दरवाजा बंद कर दिया गया था
कुतुब मीनार पर बने दरवाजे का एक नाम भी है, जिसे अलाई द्वार भी कहा जाता है। अलाई दरवाजा, कुतुब मीनार का प्रवेश द्वार दिल्ली सल्तनत के अला-उद्दीन खिलजी द्वारा निर्मित किया गया था। इस दरवाजे से कुतुब परिसर के तमाम परिसर जोड़े गए हैं, जिसे अंदर जाकर हम तमाम चीजें देख सकते हैं
बॉलीवुड के फेमस एक्टर और डायरेक्टर देवानंद यहां अपनी फिल्म के गाने 'दिल का भंवर करे पुकार' की शूटिंग की करना चाहते थे, लेकिन कैमरे मीनार के छोटे रास्तों में फिट नहीं हो पा रहे थे, इसकी वजह से यहां शूटिंग नहीं हो सकी, लेकिन इसका फील लाने के लिए कुतुब मीनार की रेप्लिका में शूटिंग की गई।
स्टोरी अच्छी लगी हो तो लाइक और शेयर करें।