राजस्थान के फेमस मेंहदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहासराजस्थान के फेमस मेंहदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास

जानिए इससे जुड़े रोचक तथ्य और धार्मिक मान्यताएं

देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर

आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बार में बताने जा रहे हैं जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर है, इस मंदिर का नाम है मेंहदीपुर बालाजी यह राजस्थान में है, आइए आपको बताते हैं इससे जुड़ी रोचक तथ्य...

दौसा जिले मे स्थित

राजस्थान के मेंहदीपुर बालाजी मंदिर दौसा जिले मे स्थित है. यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है. मान्यता के अनुसार इस मंदिर को काफी कल्याणकारी माना गया है

मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य

कहते हैं कि भूत-प्रेत की बाधाओं और नकारात्मकक बुराइयों से बचने के लिए प्रेतराज सरकार के दरबार में हर रोज 2 बजे कीर्तन होता है. यहां पर भैरवबाबा की मूर्ति है.

मेंहदीपुर बालाजी मंदिर के नियम

मेंहदीपुर बालाजी मंदिर आने वाले सभी लोगों को एक सप्ताह तक अंडा, मांस, शराब, लहसुन और प्याज का सेवन बंद करना पड़ता है. ये नियम यहां के सभी भक्तों के लिए होता है.

मंदिर का इतिहास

मेंहदीपुर बालाजी मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक कहानी काफी प्रचलित है. इस मंदिर में तीन देवता लगभग 1 हजार साल से विराजमान हैं.

अपने आप बनी मूर्ति

माना जाता है कि अरावली पहाड़ियों के बीच हनुमान भगवान की मूर्ति अपने आप बनी हुई है. इसे किसी भी कलाकार ने नहीं बनाया है.

मंदिर निर्माण का संकेत

वहीं कहा यह भी जाता है कि इस मंदिर के पुराने महंत को सपना आया था सपने में उन्होंने तीनों देवताओं को देखा था. इसे ही बालाजी मंदिर के निर्माण होने का संकेत माना जाता है.

नहीं ले जा सकते घर

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के किसी भी तरह के प्रसाद को आप खा नहीं सकते और ना ही किसी को दे सकते हैं। यहां के प्रसाद को आप घर पर भी नहीं लेकर जा सकते।

ऐसा करने पर

यहां तक की कोई भी खाने-पीने की चीज और सुंगधित चीज आप यहां से घर नहीं लेकर जा सकते। बताया जाता है ऐसा करने पर ऊपरी साया आपके ऊपर आ जाती है।

बायीं छाती में है छेद

मेहंदीपुर बालाजी की बायीं छाती में एक छोटा सा छेद है जिससे लगातार जल बहता रहता है। कहते हैं यह बालाजी का पसीना है।

भक्त करते हैं यह नियम पालन

मेहंदीपुर बालाजी की मूर्ती के ठीक सामने भगवान राम-सीता की मूर्ती है, जिसके वह हमेशा दर्शन करते रहते हैं। यहां हनुमानजी बाल रूप में मौजूद है।