श्रीनाथ जी मंदिर का अनोखा इतिहास।

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नाथद्वारा मंदिर का इतिहास

नाथद्वारा में स्थापित भगवान श्रीनाथजी के विग्रह को मूलरूप से भगवान कृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है. राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बहुत समृद्ध है।

श्रीनाथ जी मंदिर का अनोखा इतिहास

इस प्रमुख तीर्थस्थल पर श्रीनाथजी मंदिर में भगवान कृष्ण सात वर्षीय 'शिशु' अवतार के रूप में विराजित हैं। औरंगजेब भी मथुरा जिले में बाल रूप श्रीनाथजी की मूर्ति को तुड़वा नहीं पाया था।

श्रीनाथ मंदिर के बारे में 5 रोचक तथ्य

कृष्ण जन्मोत्सव पर 21 तोपों की सलामीः नाथद्वारा में जहां भगवान कृष्ण बालरूप में विराजे हैं, वहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी काफी धूमधाम से मनाई जाती है।आधी रात को ठीक 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव पर यहां 21 तोपों की सलामी दी जाती है।

श्रीनाथजी की​ दिन में आठ बार पूजा

वल्लभाचार्य के बेटे विट्ठल नाथजी भगवान श्रीनाथजी के बड़े भक्त थे और भगवान की निस्वार्थ रूप से सेवा और भक्ति करते थे, श्रीनाथजी की भक्ति को चरम सीमा पर पहुंचाया। यहां पर भगवान श्रीनाथजी की दिन में आठ बार पूजा की जाती है।

श्रीनाथ की ठोढ़ी में हीरा सुशोभित

भगवान के होठों के नीचे एक हीरा भी लगा हुआ है। भले ही यह प्रसंग इतिहास में न हो किन्तु इसे जन-श्रुति या लोक-श्रुति कह सकते हैं, श्रीनाथजी की ठोढ़ी पर जो मूल्यवान हीरा सुशोभित है।

श्रीनाथजी की यात्रा पर मिलता है फल

अर्थात् जो व्यक्ति भारत के चारों कोणों पर स्थित रंगनाथ, द्वारिकानाथ तथा बद्रीनाथ की यात्रा करके श्रीनाथद्वारा की यात्रा नहीं करता, उसे यात्रा का फल नहीं मिलता है।

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